रात का राजा ' चंद्रमा'

 दुष्यन्तकुमार वर्मा 'निराला' ✍️

            रात का राजा 'चाँद'

रात का राजा चाँद आए , रजनीगंधा वन महकाए

रातरानी जी मन को भाए सेवती चम्पा भी मुस्काए,


फूल अपना रंग बिखेरे , चली हवा भी धीरे - धीरे

लगती प्यारी धरा सुहानी,कलकल करती झरना रानी


नभ तारों के दीप जलाये,प्रकृति विलक्षण रूप बनाएं

रात पूर्णिमा प्रिया तुम्हारी ,जुगनू जगमग देखो सारी


टीम टीम तारे गगन में छाए, बादल पीछे दौड़ लगाये

सावन पावन है मनभावन,रातका मौसम मधुर सुहावन


मधुर मनोहर चाँद निराला, चांद चांदनी धरा की माला 

शीतल सुंदर रूप सुहाना , रात का राजा चंदा मामा 


धरा ओंस की माला पहने, चमके हैं मोती के गहने 

सुख-दुख आता है क्रमसे,चंद्र कहता सीखो कुछ हमसे


चंदा मामा पास आ जाओ , पूर्ण धरा की सैर कराओ

चाँद सा राजा मैं बन जाऊ , वसुंधरा को स्वर्ग बनाऊ

दुष्यंत कुमार वर्मा (शिक्षक एवं साहित्यकार)*✍️

ग्राम - परसदा-05, पोस्ट-पोड़

विकासखंड-अभनपुर, जिला-रायपुर (छत्तीसगढ़)

पिन कोड :- 493661,फो.नं.- 9039700108

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