शिक्षक पालक बालउत्कर्ष वर्तमान शिक्षा और भारतवर्ष
•••~=== *शीर्षक* ===~•••
*"शिक्षक पालक बाल -उत्कर्ष*
*वर्तमान शिक्षा और भारतवर्ष"*
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✍ *दुष्यंतकुमार वर्मा*✍
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*मेरा अनुभव*
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*हमने कोई जन्म में*
*कोई पुण्य कर्म किए होंगे।*
*तभी तो ईश्वर ने हमें*
*शिक्षकीय कार्य दिए होंगे।*
*संचित पुण्य प्रताप का*
*यह ईश्वरीय वरदान है।*
*हर बच्चों को आशीष देना*
*अविस्मरणीय सम्मान है।*
🌷 *_शिक्षक_* 🌷
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गुरु की गरिमा और महिमा
अम्बर सा विस्तार हैं।
महामानव बनाने वाला
अद्भुत तारनहार है।
नहीं चाहिए उपलब्धि गुरु को
शिष्य उपलब्धि सार है।
प्रलय निर्माण गोद में पलते
पलता यह संसार है।
*विद्यार्थियों के जीवन की*
*शिल्पकार हैं शिक्षक।*
*पतझड़ और सावन की*
*नवबहार हैं शिक्षक।*
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*बुद्धि दायिनी सरस्वती की*
*नव शृंगार हैं शिक्षक।*
*समाज के लिए संजीवनी*
*बहुत असरदार हैं शिक्षक।*
*मृदा को भी सोना बना दे*
*वह कुंभकार हैं शिक्षक।*
*धरती का अमूल्य आभूषण*
*अमूल्य उपहार हैं शिक्षक।*
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ना उठाओ गुरु पर उंगली
यह बच्चों के निर्माता है।
कोयला से हीरा बनाने वाला
शिक्षक अद्भुत सांचा है।
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कुंभकार यह स्वर्णकार ये
विभिन्न कलाओं में संपन्न है।
ऊंचा लक्ष्य कार्यों में दक्ष
समाज का आधार स्तंभ है।
*अनुशासित विद्यासागर में*
*जब बच्चे डुबकी लगाते हैं।*
*सवरता है भविष्य उनका*
*हर उलझन सुलझाते हैं।*
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*शिक्षा से ना घाटा किसी का*
*मां सरस्वती स्वयं आते हैं।*
*गुरु गोंद में बैठ शिष्य को*
*ज्ञान कवच मिल जाते हैं।*
नित नवीन प्रेरणा देकर
हर पल भव्य बनाता है।
दूरगामी सवेद्ना देकर
हमारे सपनों को सजाता है।
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चंदन भांति सुगंधित करके
हमारा जीवन को महकताहै।
स्वाभिमान की शिक्षा देकर
हमे संस्कारवान बनाता हैं।
प्यार दुलार और अपनापन
जहां बेशुमार रहते है।
अनुशासित लघु समाज को
विद्यालय परिवार कहते हैं।
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🌷 *पालक* 🌷
*आपको भी किसी समय में*
*किसी शिक्षक ने पढ़ाया होगा*
*गुर सिखाने जिंदगी की*
*डांटा और हंसाया होगा।*
*गुरु ज्ञान किस्मत की मोती*
*कितनों जीवन सजाया होगा*
*व्यर्थ समय गंवाने वाले*
*जीवन भर पछताया होगा।*
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गुरु की गुरुता ग्रहण कर
सत्य पथ तुम जा रहे।
गुरु आश्रय छोड़ने वाले
दर-दर ठोकर खा रहे।
बचपन की उन गलतियों को
पालक फिर दोहरा रहे।
बच्चों की बातों में आकर
गुरु पर उंगली उठा रहे।
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*छोटी-छोटी बातों को लेकर*
*सीधे स्कूल चले आते हो।*
*अपमानित करके सबके बीच*
*गुरु को ठेस पहुंचाते हो।*
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*सरस्वती मानस बेटो को*
*नजरों से गिराते हो।*
*भूतो ना भविष्यति जानकर*
*अपना निर्णय सुनाते हो।*
*बच्चों को अपनाकर शिक्षक*
*नया-नया सिखाते हैं।*
*प्यार जता कर डांट लगाकर*
*जिंदगानी बनाते हैं।*
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दिल टूट जाने से बोलो
अपनापन कैसे आएगा।
अब कक्षा में जब जाएगा
बच्चों को कैसे पढ़ाएंगा।
यह बात सही या गलत जरा
सोचिए और विचार कीजिए
अपना मन बुहारिये_
सरलता का व्यवहार कीजिए
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जिसमें धरती जैसा धीरज
और सागर की गहराई है।
स्वाभिमानी है शिक्षक
वरदानी को आभार दीजिए।
*जबजब शिक्षक हुआ अपमानित*
*मानवता का नीव हिला है।*
*वह समाज हुआ है श्रापित*
*कलंकित उसका पतन हुआ है*
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मंथन करें मेहमानों संग
चार बच्चे घर आ जाते हैं।
रुक जाए यदि पखवाड़े भर
कितना उथल-पुथल मचातेहैं
कभी डांटते होते हो गुस्सा
कभी डंडे भी बरसाते हो।
चार बच्चों को चार दिन
संभाल नहीं पाते हो।
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*सोचिए हजारों बच्चों को*
*शिक्षक कैसे पढ़ाते होंगे?*
*अलग सोच हर बच्चों की*
*कैसे समरसता लाते होंगे?*
*दो बच्चों के कुछ हरकतों से*
*आप पकड़ लेते हो सिर!*
*सैकड़ों बच्चों को हंसी खुशी*
*गुरु कैसे समझाते होंगे?*
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शिक्षक बनना आसान नहीं
कड़ी मेहनत लगता है।
रात जागता ख्वाब देखता
कठिनाइयों से लड़ता है।
हर विभाग से कठिन परीक्षा
देकर शिक्षक बनते हैं।
हर कक्षा मेरिट में आता
तभी परीक्षक बनते हैं।
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आपका भी मन गुरु के प्रति
साफ होना चाहिए।
भरोसा और समर्पण
लाजवाब होना चाहिए।
*शिक्षक वेतन भोगी है*
*लोग मानसिकता बनाते हैं?*
*चौक-चौराहे हर बच्चों को*
*यह संकीर्णता दिखाते हैं?*
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*सुनकर आपकी बातों वे*
*आदर भाव नहीं करते हैं।*
*अनुशासनहीन होते वे बच्चे*
*इन दुर्भावो में रहते हैं।*
क्यों न मिलें वेतन शिक्षक को
इस काम में जीवन खपाते हैं।
संघर्षों से लड़कर सैकड़ों
विद्यार्थी को कुंदन बनाते हैं।
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शिक्षक जैसा आपका
और किसी से नाता है।
कभी उंगली उठाए उनपर
जो लाखों वेतनपाता है।
*40 साल से नौकरी वाला*
*कोई विभाग बता दो*?
*शिक्षक से हो कम वेतन तो*
*गिनती में गिना दो*?
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*पुलिस हो या डॉक्टर*
*या विभागीय कर्मचारी।*
*वकील हो या इंजीनियर*
*लूट फरेब है मारामारी।*
निस्वार्थ भाव से आपका
कौन सहयोग करता है_?
सरकारी वेतन मिलने पर भी
कौन झोली भरता है_?
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नजरियों को बदलिए
गुरुओं को सम्मान दीजिए
ना बातों में बहकिये
योगदान प्रदान कीजिए।
*शिक्षा ही वरदान है*
*यह बच्चों को समझाइए।*
*गुरु ईश्वर समान है*
*स्वयं जागरूकता लाइए।*
*आप समझेंगे शिक्षक को*
*बच्चे भी समझ जाएंगे।*
*आप अपना कर्तव्य निभाइए*
*शिक्षकअपना फर्ज निभाएंगे*
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शिक्षकों को भी घर बुलाइए
बातें खुलकर बताइए।
बच्चों के हर पहलू और
स्थिति से अवगत कराइए।
जरूर सुनेंगे आपको
समझेंगे व्यवहार को।
ध्यान रखेंगे बच्चों का
और आपके संसार को।
बेस्ट व्यवहार विचार से
श्रेष्ठ वातावरण बन जाएगा।
बच्चे देखेंगे आपको
स्वयं अनुशासित हो जाएगा।
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सकारात्मक होगी सोच
हर मुश्किल से लड़ेगा।
खड़े होंगे पैरों पर अपने
हर मुकाम हासिल करेगा।
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🌷*शिक्षक कार्य*🌷
*विद्यार्थी का विश्वास भरा*
*विद्या से जुड़ा रिश्ता है।*
*अनगढ़ को भी सुघड़ बना दें*
*शिक्षक वह फरिश्ता है।*
*हर बच्चों की समस्याओं को*
*शालीनता से निपटाते हैं।*
*शासन के हर करते काम*
*और तल्लीनता से पढ़ाते हैं।*
*रातों को तैयारी करते*
*कल क्या पढ़ाना बच्चों को।*
*सरल से सरल विधि ढूंढते*
*कैसे समझाना उन बच्चों को*
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*आपके बच्चे रख ख्यालों में*
*मां-बाप की भूमिका निभाते हैं*
*शिक्षक भी मनोवैज्ञानिक है*
*बच्चों के सपने सजाते हैं।*
सप्ताहिकसेड्यूल मध्यानभोजन
सैकड़ों रजिस्टर बनाते हैं।
जनगणना हो या मतगणना
घर घर योजना चलाते हैं।
खाता बैंक साइकिल गोस्वारा
कभी डाकिया भी बन जातेहैं
आधार हो या एसेमसी
सरकारी अभियान चलाते हैं।
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सटीक आंकड़ा सरकारी काम
पूरे साल भर बनाते हैं।
चारका काम अकेले है करते
पर समय निकाल पढ़ाते हैं।
*बिना सरकारी सहयोग के*
*क्वॉरेंटाइन ड्यूटी निभाते हैं*
*धैर्य साहस मनोयोग से*
*जागृत समाज बनाते हैं।*
*पड़ोसी भी गुरु के पास*
*विश्वास करके आते हैं।*
*बैंक राशन आवेदन बनवाते*
*दर्जनों काम निपटाते है।*
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*भविष्य संवारते कितनों के*
*कई बच्चे गोद लेते हैं।*
*प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रुप से*
*गुरु लाखों के चहेते हैं।*
*शिक्षक कभी छाया*
*तो कभी धूप होते हैं।*
*लोग कहते हैं सच में गुरु*
*भगवान का रूप होते हैं।*
*वेदना समझते बच्चों की*
*दिल के करीब ही मानते हैं*
*अंतःकरण निरीक्षण करते*
*सिखाने की विधि जानते हैं*
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🌷 *वर्तमान शिक्षा पद्धति*🌷
✍(दुष्यंतकुमार )✍
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लोगों की नजरों में गुरु
भूमिका गौण हो गई।
गुरु-शिष्य की परंपरा
ना जाने कहां खो गई।
राजनीति में माँ सरस्वती
गुरू अपमानित रह गया।
बांध दिए हाथ पैरों को
शिक्षक श्रापित रह गया।
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*शिक्षक अब बन गए भिक्षक*
*राजनीतिक जरिया बनाते हैं*
*लोगों के बहकावे में आकर*
*शिक्षक को भी आजमाते हैं*
*आधुनिकता की दौड़ में*
*हमने स्वयं को भुला दिया*
*गुरुकुल की शिक्षा पद्धति*
*हमने धूल में मिला दिया*
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विदेशियों की दुहाई देकर
सभ्यता चरमरा गई।
भारतीयों की मानसिकता से
मां भारती शरमा गई!
पाठ्यक्रम बनाने वाले
विदेशों से पढ़कर आ रहे।
भारतीय पाठ्यक्रमों में भी
विदेशियों के गुण गा रहे।
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कितना ही रहस्यमयी ज्ञान
खंडहरों में दबा दिये।
पुस्तकालय,संग्रहालयऔर
साहित्य भंडार जला दिये।
*भारतीय संस्कृति और हिंदी*
*अब कम पढ़ाया जाता है।*
*भारतीय धरोहर तुच्छ हो रहा*
*पाश्चात्य सजाया जाता है।*
*इस कुचक्र फँसकर*
*शिक्षा भी व्यापार हो गए।*
*ऐसी शिक्षा पद्धति से*
*शिक्षक भी लाचार हो गए।*
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रसहीन इस पाठ्यक्रमों को
पढ़ाना भी मजबूरी है।
पढ़ेंगे जैसा बनेंगे वैसा
यह प्रणाली भी अधूरी है।
बदलते इस पाठ्यक्रम में
ना शिक्षा है ना नैतिकता।
भारतीय महत्व भुल रहे हम
विदेशियों की है प्राथमिकता
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*ना शिक्षा है ना मानवता है*
*ना गुणवत्ता पूरी है।*
*जहां भविष्य अंधकार में है*
*क्या ऐसी शिक्षा जरूरी है?*
ना है राष्ट्रीयता विद्यमान
ना कोई सेवा भाव है।
बेरोजगारी और मारकाट
इसी प्रणाली का प्रभाव है।
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ना समाधान ना सुझाव है
ना किसी को लगाव है।
अंग्रेजों की इस पद्धति में
आभाव ही अभाव है।
*मैकाले की वाणी होरही सच*
*भारततो गुलाम ही रहेगा।*
*नाम मात्र के हिंदुस्तानी*
*अंग्रेजी को सलाम करेगा।*
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*तन से भारतवासी*
*पर मन से अंग्रेज रहेगा।*
*दिल में रख गोरो की नीति*
*अपनों से नफरत करेगा।*
*कहा था कि भारतवासी*
*अपनी संस्कृति गिराएंगे।*
*हिंदी से करेंगे नफरत लोग*
*अंग्रेजी पद्धति अपनाएंगे।*
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किसी देश की शिक्षापद्धति
जब-जब बदला गया।
पतन हुआ उस देश का
चरित्र गिरता गया।
वर्तमान शिक्षा पद्धति मे
लार्ड मैकाले का प्रचार है।
विकट समस्या इस चुनौती में
कहो आपका क्या विचार है?
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*स्व की शिक्षा प्रणाली से*
*हमविश्वगुरु कह लाए थे।*
*स्वदेशी माटी से प्रेम कर*
*ज्ञान ध्वजा फहराए थे।*
*भारतीय भाषा में अपनापन*
*यही समरसता लायेगा।*
*भारत का सम्मान बढ़ेगा*
*समस्या भी सुलझयेगा।*
*गांधीजी देखे जो सपना*
*वह पूरा सच हो जाएगा।*
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पुरानी शिक्षा पद्धति में
भारत का संरक्षण है।
बौद्धिक विकास तकनीकी
और मानवता के लक्षण हैं।
शिक्षा में संस्कार और
जीवन में शिष्टाचार हो।
वैदिक ज्ञान विज्ञान संग
समर्पण व्यवहार हो।
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संस्कृति के विकृति को
अब हमें सुधारना होगा।
अपनी प्रकृति अपनाकर
पश्चिम को पछाड़ना होंगा।
प्रखर भारत के उत्थान में
यह हौसला लाना होगा।
आत्म निर्भर बनेगा भारत
सृजन आंदोलन चलाना होगा
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✍ *रचनाकार* ✍
*_दुष्यंतकुमारवर्मा 'सजल'_*
🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏































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