निराला मेरा गांव

 "मधुमय निश्चल गांव में हंसती है मां भारती"

दुष्यंत कुमार वर्मा 


सबसे सुंदर सौम्य सलोना, प्यारा मेरा गांव है

सबसे स्वर्णिम अद्भुत निर्मल निराला मेरा गांव है 


गांव की शीतल शीतला मैया छाया बूढ़ी माई है

दक्षिण मुखी बजरंगबली मध्य मंदिर महामाई है

प्राची दिशा महादेव विराजे सहाड़ादेव सहारा है 

देवी देवता की पुण्य भूमि,गांव तो जग से न्यारा है


हर घर में तुलसी आंगन ,बच्चों की किलकारी है

संस्कृति पलती संयुक्त परिवार मे बच्चे संस्कारी है 

पूर्वजों की किवदंती है पौराणिक सत्य कहानी है

बड़े बूढ़े के आशीर्वचन से ग्राम्य सभ्यता सुहानी है 


भारत को पहचानना है तो गांव आकर देखो 

भारतीय संस्कृति जानना है तो गांव आकर देखो

अपनी जिंदगी सवारना है तो गांव आकर देखो 

संस्कृति सभ्यता अवधारणा को गांव आकर देखो

 

शुद्ध हवा शुद्ध भोजन, हम शुद्ध गंगाजल पीते हैं

गले लगा हर सुख दुख में ,मिल बांट कर जीते हैं

यही रिवाज मेरे गांव की,जहां मानवता सजाते हैं 

सभी के लिए वक्त यहां,घटना गांव सुलझाते हैं

इसलिए भारत में गांव ,मुख्य भूमिका निभाते हैं


सादगी शांति शालीनता ,मेरे गांव की पहचान है 

रामलीला मड़ाई मेला और दुर्गा पूजा भी महान है 

ताल तलैया बाग बगीचा ,सुंदर खेत खलियान है 

स्वच्छ चांदनी बिखेरे बाहें खोले आसमान है 


श्रद्धा समर्पण पूजन व पुराणोंकी बात होती है 

कहीं गीता कहीं रासलीला, रामायण रात होती है 

भक्ति भजन उत्सव आयोजन रामलीला होती है 

पुरुष अपनाते राम आचरण, नारी सीता होती है 


चाहे गांव में गरीबी कुछ है चाहे अल्प अभाव है

शीतलमन मेहनती दुनिया निश्चल मानवस्वभाव है

जन्नत है भाई मन्नत है गांव का स्वर्णिम संसार है 

बिजली सड़कों में नहीं पर, खुशहाली बेशुमार है


जीवन के विरानियों की कहानी होती है गांव की 

सच्ची इंसानियत रस्में ,सुहानी होती है गांव की 

हंसी ठिठोली गुंजन जिंदगानी होती हैगांव की

खुलकर हंसती मांभाभी ,बेटीरानी होती है गांवकी


अरे, सच कहूं तो मां भारती, गांव में बसती है 

निष्कलंक अहिंसामय जहाँ संस्कृति सजती है 

सतरंगी नैसर्गिक दुनिया मंदिरों में घंटी बजती है

जहां मानवता से मां भारती मुस्काती हंसती है


रंग बिरंगी तितलियों की दुनिया, 

खेलती प्यारी गुड़िया मुनिया

 मीठा फल भंवरों का गुंजन, 

फूलों से करती वह अंजन

 झूमती गाती सरसों लहराती,

 चिड़िया चंचल शोर मचाती 

भारत है गांव की धरती, 

जहां प्रेम मधुरस बरसाती

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