वर्तमान शिक्षा
🌷 *वर्तमान शिक्षा पद्धति*🌷
✍(दुष्यंतकुमार )✍
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लोगों की नजरों में गुरु
भूमिका गौण हो गई।
गुरु-शिष्य की परंपरा
ना जाने कहां खो गई।
राजनीति में माँ सरस्वती
गुरू अपमानित रह गया।
बांध दिए हाथ पैरों को
शिक्षक श्रापित रह गया।
*शिक्षक अब बन गए भिक्षक*
*राजनीतिक जरिया बनाते हैं*
*लोगों के बहकावे में आकर*
*शिक्षक को भी आजमाते हैं*
*आधुनिकता की दौड़ में*
*हमने स्वयं को भुला दिया*
*गुरुकुल की शिक्षा पद्धति*
*हमने धूल में मिला दिया*
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विदेशियों की दुहाई देकर
सभ्यता चरमरा गई।
भारतीयों की मानसिकता से
मां भारती शरमा गई!
पाठ्यक्रम बनाने वाले
विदेशों से पढ़कर आ रहे।
भारतीय पाठ्यक्रमों में भी
विदेशियों के गुण गा रहे।
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कितना ही रहस्यमयी ज्ञान
खंडहरों में दबा दिये।
पुस्तकालय,संग्रहालयऔर
साहित्य भंडार जला दिये।
*भारतीय संस्कृति और हिंदी*
*अब कम पढ़ाया जाता है।*
*भारतीय धरोहर तुच्छ हो रहा*
*पाश्चात्य सजाया जाता है।*
*इस कुचक्र फँसकर*
*शिक्षा भी व्यापार हो गए।*
*ऐसी शिक्षा पद्धति से*
*शिक्षक भी लाचार हो गए।*
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रसहीन इस पाठ्यक्रमों को
पढ़ाना भी मजबूरी है।
पढ़ेंगे जैसा बनेंगे वैसा
यह प्रणाली भी अधूरी है।
बदलते इस पाठ्यक्रम में
ना शिक्षा है ना नैतिकता।
भारतीय महत्व भुल रहे हम
विदेशियों की है प्राथमिकता
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*ना शिक्षा है ना मानवता है*
*ना गुणवत्ता पूरी है।*
*जहां भविष्य अंधकार में है*
*क्या ऐसी शिक्षा जरूरी है?*
ना है राष्ट्रीयता विद्यमान
ना कोई सेवा भाव है।
बेरोजगारी और मारकाट
इसी प्रणाली का प्रभाव है।
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ना समाधान ना सुझाव है
ना किसी को लगाव है।
अंग्रेजों की इस पद्धति में
आभाव ही अभाव है।
*मैकाले की वाणी होरही सच*
*भारततो गुलाम ही रहेगा।*
*नाम मात्र के हिंदुस्तानी*
*अंग्रेजी को सलाम करेगा।*
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*तन से भारतवासी*
*पर मन से अंग्रेज रहेगा।*
*दिल में रख गोरो की नीति*
*अपनों से नफरत करेगा।*
*कहा था कि भारतवासी*
*अपनी संस्कृति गिराएंगे।*
*हिंदी से करेंगे नफरत लोग*
*अंग्रेजी पद्धति अपनाएंगे।*
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किसी देश की शिक्षापद्धति
जब-जब बदला गया।
पतन हुआ उस देश का
चरित्र गिरता गया।
वर्तमान शिक्षा पद्धति मे
लार्ड मैकाले का प्रचार है।
विकट समस्या इस चुनौती में
कहो आपका क्या विचार है?
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*स्व की शिक्षा प्रणाली से*
*हमविश्वगुरु कह लाए थे।*
*स्वदेशी माटी से प्रेम कर*
*ज्ञान ध्वजा फहराए थे।*
*भारतीय भाषा में अपनापन*
*यही समरसता लायेगा।*
*भारत का सम्मान बढ़ेगा*
*समस्या भी सुलझयेगा।*
*गांधीजी देखे जो सपना*
*वह पूरा सच हो जाएगा।*
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पुरानी शिक्षा पद्धति में
भारत का संरक्षण है।
बौद्धिक विकास तकनीकी
और मानवता के लक्षण हैं।
शिक्षा में संस्कार और
जीवन में शिष्टाचार हो।
वैदिक ज्ञान विज्ञान संग
समर्पण व्यवहार हो।
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संस्कृति के विकृति को
अब हमें सुधारना होगा।
अपनी प्रकृति अपनाकर
पश्चिम को पछाड़ना होंगा।
प्रखर भारत के उत्थान में
यह हौसला लाना होगा।
आत्म निर्भर बनेगा भारत
सृजन आंदोलन चलाना होगा


















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